Monday, December 09, 2013

अफवाहों का बाज़ार गर्म है


अफवाहों का बाज़ार गर्म है,
ख़बरे पतंगों सी उडती है,
ना मालूम किस पग पे गढ्ढा है,
ना मालुम कहा पे पानी है,
इस कदर है धूल चढ़ी, 
आँखों में पानी भर आया है,
बिन आँखों के चलना मजबूरी है,
चुनाव का समय जो आया है,
ये कह दो वो कह दो कुछ तो सोचो की आवाजे 
चहूँ दिशा से आती है,
अफवाहों का बाज़ार गर्म है,
अब तो हर आवाज बुलंद है,
मेरा दिल घबराता है,
जाने क्यों कतराता है,
अन्धो सा भटक रहा हूँ,
विश्वास कही नहीं पाता हूँ,
अपने ही घर में, अपनो के बीच,
अपने को बेहद अकेला पाता हूँ
अफवाहों का बाज़ार गर्म है,
ख़बरे पतंगों सी उडती है,
अफवाहों का बाज़ार गर्म है,
ख़बरे पतंगों सी उडती है,

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